नागपंचमी पर वन्यजीव संरक्षण की अपील नागपंचमी केवल नागों की पूजा का पर्व नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा में प्रकृति और नागों के प्रति सम्मान की भावना से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है

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नागपंचमी पर वन्यजीव संरक्षण की अपील

नागपंचमी केवल नागों की पूजा का पर्व नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा में प्रकृति और नागों के प्रति सम्मान की भावना से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन नाग देवताओं की पूजा की जाती है और परिवार की सुख-समृद्धि एवं सुरक्षा की कामना की जाती है। भगवान शिव के गले में नाग, भगवान विष्णु की शेषनाग पर शयन की परंपरा तथा समुद्र मंथन में वासुकि नाग की कथा नागों के धार्मिक महत्व को दर्शाती हैं।नागपंचमी का संबंध वर्षा ऋतु और कृषि-जीवन से भी जोड़ा जाता है। बरसात में साँप अपने बिलों से बाहर आ सकते हैं और खेतों में साँप चूहों जैसे कृंतकों की संख्या नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए इस पर्व को आज के समय में वन्यजीवों के प्रति सम्मान और संरक्षण का संदेश देने के अवसर के रूप में भी देखा जा सकता है।

 नागपंचमी की हार्दिक शुभकामनाए 

नागपंचमी केवल नागों की पूजा का पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति और वन्यजीवों के प्रति हमारी जिम्मेदारी और संवेदनशीलता को याद करने का अवसर भी है।

इस पावन अवसर पर आप सभी से विनम्र अपील है कि—

क्या करें?

साँप दिखाई देने पर उससे सुरक्षित दूरी बनाए रखें।

 साँप को पकड़ने या मारने की कोशिश न करें, बल्कि वन विभाग या प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को सूचना दें।

 साँपों और अन्य वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास एवं जीवन का सम्मान करें।

बच्चों को वन्यजीवों के प्रति प्रेम और संरक्षण की भावना सिखाएँ।

 पूजा के नाम पर किसी भी जीव को कष्ट न पहुँचाएँ।

क्या न करें?

- साँप को दूध न पिलाएँ।

- साँप को पकड़कर भीड़ में प्रदर्शन न करें।

- साँप के साथ फोटो या वीडियो बनाने के लिए उसके करीब न जाएँ।

किसी भी वन्यजीव को चोट न पहुँचाएँ और न ही उसे मारें।

 अंधविश्वास के कारण वन्यजीवों के साथ क्रूरता न करें।

 साँपों से जुड़े कुछ आम मिथक और सच्चाई


नागपंचमी के अवसर पर साँपों से जुड़े कुछ प्रचलित भ्रमों को समझना भी जरूरी है:

 मिथक: साँप दूध पीते हैं।

 सच्चाई: साँप स्तनधारी नहीं हैं और दूध उनका प्राकृतिक आहार नहीं है। उन्हें दूध पिलाना उनके लिए हानिकारक हो सकता है। नागपंचमी पर श्रद्धा के नाम पर साँपों को दूध पिलाने के बजाय उन्हें सुरक्षित और स्वतंत्र रहने देना चाहिए।

 मिथक: साँप इंसानों से बदला लेते हैं।

 सच्चाई: साँप इंसानों की तरह बदला लेने की योजना नहीं बनाते। किसी व्यक्ति या दूसरे जीव द्वारा परेशान किए जाने पर वे मुख्यतः बचने या अपनी रक्षा करने की कोशिश करते हैं। विशेषज्ञ भी बताते हैं कि साँप सामान्यतः आक्रामक से अधिक defensive होते हैं।

मिथक: साँप किसी इंसान का पीछा करके उसे काटने आते हैं।

  सच्चाई: अधिकांश परिस्थितियों में साँप इंसान से दूर जाने की कोशिश करते हैं। अगर साँप आपकी ओर आता हुआ दिखाई दे, तो जरूरी नहीं कि वह आपका पीछा कर रहा हो—वह भोजन, आश्रय या सुरक्षित रास्ते की तलाश में हो सकता है। उसे रास्ता दें और दूरी बनाए रखें।

मिथक: नागमणि नाम की कोई वास्तविक वस्तु साँप के पास होती है।

 सच्चाई: नागमणि लोककथाओं और पौराणिक मान्यताओं का हिस्सा है; वैज्ञानिक रूप से साँप के शरीर में ऐसी कोई चमकने वाली या कीमती “मणि” पाए जाने का प्रमाण नहीं है।

 मिथक: हर साँप जहरीला होता है।

  सच्चाई: सभी साँप विषैले नहीं होते। अलग-अलग प्रजातियों की पहचान और व्यवहार अलग होता है, इसलिए किसी अनजान साँप को छूना या पकड़ना नहीं चाहिए।

आस्था अपनी जगह है और विज्ञान अपनी जगह—लेकिन दोनों के बीच एक सुंदर रास्ता है: जीव के प्रति सम्मान। नागपंचमी पर साँपों को पकड़कर पूजा करने के बजाय उनके जीवन और प्राकृतिक आवास की रक्षा करना ही वन्यजीव संरक्षण की सच्ची भावना है।

वन्यजीव हमारे दुश्मन नहीं, बल्कि प्रकृति के महत्वपूर्ण अंग हैं।

साँप खेतों में चूहों की संख्या नियंत्रित करने से लेकर पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

आइए इस नागपंचमी पर हम केवल नाग देवता की पूजा ही नहीं, बल्कि हर वन्यजीव के जीवन का सम्मान करने का संकल्प लें।

वन्यजीवों से प्यार करें, उनकी रक्षा करें और प्रकृति को सुरक्षित रखें। 

 नागपंचमी क्यों मनाई जाती है?

1. नागों को देवत्व का सम्मान देने की परंपरा

हिंदू परंपरा में नागों को केवल एक जीव के रूप में नहीं, बल्कि नाग देवता/नागा के रूप में भी सम्मान दिया गया है। नागपंचमी सावन महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन नाग देवताओं की पूजा करके परिवार की सुख-समृद्धि, सुरक्षा और कल्याण की कामना की जाती है। 

2. भगवान शिव से नागों का संबंध

भगवान शिव के गले में सर्प का होना नागों के धार्मिक महत्व को और बढ़ाता है। इसी कारण सावन के महीने में, जो भगवान शिव को समर्पित माना जाता है, नागपंचमी का विशेष महत्व माना जाता है। 

3. भगवान विष्णु और शेषनाग

हिंदू धार्मिक परंपरा में भगवान विष्णु को शेषनाग की शय्या पर विराजमान बताया गया है। शेषनाग को अनंत का प्रतीक माना जाता है। इस कारण नागों का संबंध केवल भय से नहीं बल्कि शक्ति, संरक्षण और अनंतता से भी जोड़ा गया है।

4. समुद्र मंथन और वासुकि नाग

पौराणिक कथा के अनुसार समुद्र मंथन में वासुकि नाग को मंदराचल पर्वत के चारों ओर रस्सी के रूप में इस्तेमाल किया गया था। इससे भी नागों का धार्मिक महत्व भारतीय परंपरा में स्थापित होता है।

5. नागपंचमी और कृषि का संबंध 

भारत का पारंपरिक समाज कृषि पर बहुत निर्भर रहा है। खेतों में पाए जाने वाले साँप चूहों और दूसरे कृंतकों को खाते हैं, जो फसलों को नुकसान पहुँचा सकते हैं। इसलिए ग्रामीण जीवन में साँपों को केवल डर के नजरिए से नहीं, बल्कि कृषि और पारिस्थितिकी के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में भी देखा गया। 

6. वर्षा ऋतु से भी गहरा संबंध

नागपंचमी सावन के दौरान आती है। बारिश में जमीन के अंदर पानी भरने के कारण साँप अपने बिलों से बाहर निकल सकते हैं। इसलिए वर्षा ऋतु में मनुष्य और साँपों का सामना अधिक होने की संभावना रहती है। इस समय नागों के प्रति सम्मान और उनसे सावधानी बरतने की परंपरा का सामाजिक महत्व भी समझा जा सकता है।

नागपंचमी से जुड़ी प्रमुख पौराणिक मान्यताएँ

भारतीय परंपराओं में कई नागों का उल्लेख मिलता है—अनंत/शेष,

 वासुकि, तक्षक, कर्कोटक, कालिया आदि। अलग-अलग क्षेत्रों में इनके साथ अलग-अलग कथाएँ

 जुड़ी हैं।

विशेष रूप से तक्षक नाग का उल्लेख महाभारत की परंपरा में मिलता है। राजा परीक्षित की मृत्यु तक्षक के डसने से होने की कथा और उसके बाद जनमेजय के सर्पसत्र की कथा भारतीय पौराणिक साहित्य में प्रसिद्ध है।

इसी तरह भगवान कृष्ण और कालिया नाग की कथा भी नागों से जुड़ी प्रमुख कथाओं में से एक है।

 इसका सबसे खूबसूरत संदेश क्या है?

अगर नागपंचमी की भावना को आज के समय में समझें तो इसका एक बहुत सुंदर संदेश निकलता है:

जिस जीव से हमें डर लगता है, उसके अस्तित्व का भी सम्मान करना।

साँप इंसानों को नुकसान पहुँचाने के लिए हमारे घरों या खेतों में नहीं आते। वे भी भोजन, पानी और सुरक्षित स्थान की तलाश में रहते हैं। और प्रकृति में उनकी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका है।

इसलिए नागपंचमी पर साँप को पकड़कर उसके साथ फोटो खिंचवाना, उसे परेशान करना या प्रदर्शन करना पूजा की भावना नहीं होनी चाहिए। जीवित साँपों को पकड़कर भीड़ में दिखाने की घटनाओं में उनके साथ दुर्व्यवहार का खतरा रहता है; हाल में नागपंचमी से पहले ऐसे साँपों के रेस्क्यू की खबर भी सामने आई है। 

सच्ची श्रद्धा यही है कि नाग देवता के प्रति आस्था रखते हुए वास्तविक साँपों और दूसरे वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक जीवन के साथ सुरक्षित रहने दिया जाए।

यानी—

“नागपंचमी पर नाग की पूजा करें, लेकिन नाग को परेशान न करें।

प्रकृति को पूजने का सबसे अच्छा तरीका है—प्रकृति के जीवों की रक्षा करना।”

अविनाश यादव

अध्यक्ष, RCRS – Reptile Care and Rescuer Society, Korba

98279 17848,90099 96789,79879 57958

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