Prabal Chhattisgarh Korbaछत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध और आस्था के बड़े केंद्र कनकेश्वर महादेव मंदिर, कनकी में पावन सावन मास के अवसर पर लगने वाले पारंपरिक महामेले का आगाज होने जा रहा है। **हसदेव नदी के पावन तट पर बसे** इस ऐतिहासिक धाम में आगामी *30 जुलाई* से महामेले का शुभारंभ होगा, जिसे लेकर क्षेत्र के शिव भक्तों में भारी उत्साह और उल्लास का वातावरण है।
प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण और हसदेव नदी के कलकल बहते जल के बीच स्थित कनकी धाम में सावन के महीने में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। यहाँ दूर-दूर से पहुँचने वाले कांवड़िए और शिव भक्त पावन नदी में स्नान कर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं।
क्या है कनकेश्वर धाम का इतिहास?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कनकी का यह मंदिर बेहद प्राचीन और चमत्कारी है। स्थानीय जनश्रुतियों के अनुसार, यहाँ स्वयंभू शिवलिंग पर एक गाय प्रतिदिन दूध अर्पित किया करती थी। एक दिन ग्वाले द्वारा देखे जाने पर गुस्से में प्रहार करने से शिवलिंग का ऊपरी हिस्सा खंडित हो गया था और वहाँ चावल के टुकड़े (जिसे छत्तीसगढ़ी में 'कनकी'कहा जाता है) बिखर गए थे। इसी आधार पर इस पावन क्षेत्र का नाम 'कनकी' और यहाँ विराजे भगवान का नाम **कनकेश्वर महादेव** पड़ा।
मेले की विशेष तैयारियाँ
सावन मास के इस महामेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए युवा संगठन कनकेश्वर सेवा समिति व स्थानीय प्रशासन द्वारा पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। 30 जुलाई से प्रारंभ होने वाले इस धार्मिक अनुष्ठान और मेले से पूरा अंचल भगवान शिव की भक्ति में सराबोर नजर आएगा।

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