तपती धूप, हजारों की भीड़… और उसी बीच मानवता की एक खूबसूरत मिसाल
डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के अवसर पर कलेक्ट्रेट चौक में आयोजित कार्यक्रम के दौरान एक नन्हा बालक अर्णव (पिता– रविन्द्र, माता– करिश्मा) अपने परिजनों से बिछड़कर रोते हुए मिला।
वहीं ड्यूटी पर मौजूद नव आरक्षक कीर्ति नेताम, जो वर्तमान में माना PTS में प्रशिक्षणरत हैं, की नजर जैसे ही बच्चे पर पड़ी, उन्होंने तुरंत उसे अपने संरक्षण में लिया। ममता से गोद में उठाकर बच्चे को शांत कराया और अपने साथियों के सहयोग से उसके परिजनों की तलाश शुरू की।
कुछ ही समय में अर्णव को सकुशल उसके माता-पिता से मिलाया गया। बच्चे के चेहरे पर लौटी मुस्कान और परिजनों की आंखों में राहत—यही पुलिस सेवा का असली उद्देश्य है।
ड्यूटी के दौरान संवेदनशीलता, तत्परता और मानवीय मूल्यों का यह उदाहरण निश्चित ही प्रेरणादायक है।
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